Monday, 29 April 2013

Patthar, Pyar, Loha aur Heera


हमारी भाषा आपको इतने जल्दी समझ मे नही आयेगी… आप तो वह परंपरावादी लग रहे है ना…!

कोई कहेगा इंट का जवाब पत्थर से दो, कोई कहेगा पत्थर का जवाब प्यार से दो, तो कोई कहेगा, लोहे को लोहा कांटता है ।

मेरे मित्र पर अगर इंट का जवाब पत्थर से देंगे तो दोनो तरफ खून बहेगा, और पत्थर का अगर प्यार से देना चाहे तो ;
यह पत्थर कलियुग का पत्थर है, बिलकुल मुर्दा बन चुका है । और शायद आपका प्यार भी कलियुगी निकल जाये ।
क्या है आपके प्यार मे इतनी ताकद, जो पत्थर को भी मोम बना दे, क्या आप कर पायेंगे मीरा, महावीर और मोहम्मद जैसा प्यार…

और रही बात लोहे को लोहे से कांटने कि…
जरा सोचीये अगर लोहा कांटना है तो हमे भी अपनेसे नीचे उतरना होंगा, लोहा बनना होंगा ।
मतलब ऐसा कि न पत्थर काम मे आयेगा न कलियुगी प्यार और न लोहा… लेकिन हां ,
अगर लोहा कांटना है तो हम हिरा बन सकते है । और हिरा बनके पत्थर क्या पहाड भी कांटा जा सकता है ।
और अगर प्यार भी करना हो तो, हिरे से बडा दिल किसके पास होगा, जो कोयले से हिरा बना हो,
वह जरूर दुसरे पत्थर तक भी अपना दर्द पहुंचा सकता है और उसका दर्द समझ भी सकता है…

Dinesh Talekar
Mahatwakanksha Foundation NGO
superpowerindia.in

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