Monday, 3 June 2013

वे कहते है हम पागल है

मुझे यह समझ में नही आता कि लोग हमे वहीं बाते क्यों बताते हैं जो हम जानते हैं । वे कहते है हम पागल है । अरे भाई मै जानता हूं कि तुम्हारी नजर मे हम पागल है ।
पर हमने यह तो नही कहां  कि तुम्हारी नजर, तुम्हारी सोच हि पागल है ।
जरा अपने अंदर झांककर तो देखो, आप घब्राकर बेहोष हो जाओगे, इतना डरावना पागलपन पनप रहा है भीतर ।
अगर हमारा हंसाना, प्यार करना, मस्ती-मजाक करके आनंद बांटना, आपकी नजर मे पागलपन है तो आपका दांभिक रुप से गंभीर रहना, लोगोंको सोकौल्ड सोसायटी के बंधनो मे जकडकर रखना, यह क्या है ?

-दिनेश तळेकर

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