मुझे यह समझ में नही आता कि लोग हमे वहीं बाते क्यों बताते हैं जो हम जानते
हैं । वे कहते है हम पागल है । अरे भाई मै जानता हूं कि तुम्हारी नजर मे
हम पागल है ।
पर हमने यह तो नही कहां कि तुम्हारी नजर, तुम्हारी सोच हि पागल है ।
जरा अपने अंदर झांककर तो देखो, आप घब्राकर बेहोष हो जाओगे, इतना डरावना पागलपन पनप रहा है भीतर ।
अगर हमारा हंसाना, प्यार करना, मस्ती-मजाक करके आनंद बांटना, आपकी नजर मे पागलपन है तो आपका दांभिक रुप से गंभीर रहना, लोगोंको सोकौल्ड सोसायटी के बंधनो मे जकडकर रखना, यह क्या है ?
-दिनेश तळेकर
पर हमने यह तो नही कहां कि तुम्हारी नजर, तुम्हारी सोच हि पागल है ।
जरा अपने अंदर झांककर तो देखो, आप घब्राकर बेहोष हो जाओगे, इतना डरावना पागलपन पनप रहा है भीतर ।
अगर हमारा हंसाना, प्यार करना, मस्ती-मजाक करके आनंद बांटना, आपकी नजर मे पागलपन है तो आपका दांभिक रुप से गंभीर रहना, लोगोंको सोकौल्ड सोसायटी के बंधनो मे जकडकर रखना, यह क्या है ?
-दिनेश तळेकर
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